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मत मार मां मुझे पेट में जीने का अधिकार दे

By   /  December 13, 2018  /  Poetry  /  No Comments

मत मार मां मुझे पेट में जीने का अधिकार दे लडऩा है इस दुनिया में लडऩे के लिए तलवार दे मां तू भी तो किसी मां की पेट से जन्म ली होगी सोचो जरा जन्म नहीं देती तो संसार में क्या आयी होती बेटे को ही क्यों मां मुझे भी संसार दे तुलना मत कर […]

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चांद की रोशनी में

By   /  December 13, 2018  /  Poetry  /  No Comments

चांद की रोशनी में जगमगाते ये सितारे सितारों से सजा यह आसमां कहां खो गई वो जवानी कहां सो गई वो जवानी जरा याद करो वो काली रातें पुकार रही तुन्हे यह धरा लहरा दो तिरंगा प्यारा मातृभूमि के लिए लगा दो तुम वही नारा बदलेगी तस्वीर भारत की जब तुम अपना खून दोगे आजाद […]

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गोरसी बढ़ महान हे

By   /  December 7, 2018  /  Poetry  /  No Comments

गोरसी बढ़ महान हे गोरसी के गुन भारी, देवता सही लागथे गोरसी के बरे ले, जाड़ सीत भागथे घर परिवार ल गोरसी, सकेल के राखेथे अन चिनहार ल घलो, मया म बांधथे जुरमिल के सुख दुख, गोरसी तिर गोठयाले नीति धर्म चारी चुगली, गोरसी कर सुने पाबे सेका भूंजा आंच पाके, पीरा ल भूलाले गोरसी […]

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गज़ल

By   /  December 7, 2018  /  Poetry  /  No Comments

गज़ल गंध गुलाबों से गायब है अब कांटे ही महक रहे हैं गौरैया गुमसुम बैठी है गिद्ध गगन में चहक रहे हैं दावानल की ऊंची लपटों का अंदेशा है जंगल में हरे दरख्तों के दिल में दहशत के शोले दहक रहे हैं जेहन में राहें दिखती हैं लेकिन गायब हो जाती हैं कहीं भूख से […]

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मैं एक किसान हूं भारत की शान हूं

By   /  December 7, 2018  /  Poetry  /  No Comments

मैं एक किसान हूं भारत की शान हूं खेत जोतता फ सल उगाता, जन जन का पेट पालता माटी का बलवान पुत्र, हरियाली का निशान हूं मैं एक किसान हूं, भारत की शान हूं फसल अन्न की आस में, भुखमरी और प्यास में मेहनत करता अन्न उगाता देश का स्वाभिमान हूँ मैं एक किसान हूँ, […]

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