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पानी-पूरवाही

By   /  June 20, 2018  /  Poetry  /  No Comments

सरर-सरर चलत पूरवइया, सोर मचावत आवत हे। गरर-गरर उड़त अईसन धूररा टोर मचावत हे। चम-चम चमकत बिजुरी मन ला चमकावत हे। टरर-टरर करत मेचका आमंतरन बगरावत हे। घडऱ-घडऱ घुमरत बदरा जीव म डर हमावत हे। झरर-झरर बरसत पानी मन म उच्छाह लावत हे। महर-महर महकत माटी बिसवास मन के जागत हे। डगर-डगर चलत श्रवण माटी […]

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जीवन एक गणित है

By   /  June 20, 2018  /  Poetry  /  No Comments

जीवन एक गणित है, इसे बनाना पड़ता है । कभी करते हैं जोड़ तो, कभी घटाना पड़ता है । चलती नहीं कभी समांतर, ऊंच नीच हो जाते हैं । सम विषम के खेल में, कितने आड़े आते हैं । कभी सुख की बिंदु पाते, तो वक्र का दुख भी होता है । आड़े तिरछे जीवन […]

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पुत्र को पत्र

By   /  June 13, 2018  /  Poetry  /  No Comments

बेटा अब गांव मत आना शहर में ही रहना। हमारा गांव अब वो गांव नहीं रह गया। गांव के पुराने लोग सब गांव छोड़ कर जा चुके हैं। गरीबी के कारण उनकी जमीनें बिक चुकी हैं। बाहर से पैसे वाले आकर हमारे गांव में बड़ी संख्या में बस गए हैं। गांव के जो किसान बाहर […]

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पेड़ों को मत काटो

By   /  June 13, 2018  /  Poetry  /  No Comments

एक एक पेड़ लगाओ, धरती को बचाओ । मिले ताजा फल फूल, पर्यावरण शुद्ध बनाओ । मत काटो तुम पेड़ को, पुत्र समान ही मानो । इनसे ही जीवन जुड़ा है, रिश्ता अपना जानो । सोचो क्या होगा अगर, पेड़ सभी कट जायेंगे। कहां मिलेगी शुद्ध हवा, तड़प तड़प मर जायेंगे । फल फूल और […]

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रेल

By   /  June 6, 2018  /  Poetry  /  No Comments

छुक छुक करती आती रेल, छुक छुक करती जाती रेल । चिंटू पिंटू मोनू सोनू, दौड़ लगाये खेले खेल । पटरी पर है चलती रेल, यात्रियों को भरती रेल । इस शहर से उस शहर तक, सबको भर ले जाती रेल । सौ सौ डिब्बों वाली रेल , कभी ना रहती खाली रेल । दौड़ […]

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