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सडक़ पर गौ माता समस्या और समाधान

By   /   September 20, 2018  /   No Comments

 

. प्रवीण प्रवाह, स्वतन्त्र कवि लेखक
ग्राम. नयापारा खुर्द पोस्ट पिथौरा
हमारे देश में राष्ट्रीय राज मार्ग में फ ोर लेन सडक़ का निर्माण एक युगान्तकारी विकास के रूप में हुआ । लेकिन बढ़ती हुई सडक़ दुघर्टनाएं इस विकास की छवि को धुमिल कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि इन सडक़ दुर्घटनाओं में सबसे बड़ा कारण सडक़ों को बसेरा बना चुके मवेशियों का दल है। बहुत बडी संख्या में गाय बैल सडक़ों पर हमेशा विचरण करते रहते हैं । फलस्वरूप सडक़ दुर्घटनाओं में प्रति दिन बड़ी संख्या में इन मवेशियों के साथ साथ मनुष्यों को भी जान से हाथ धोना पड़ रहा है । हमें सोचना चाहिए कि आखिर गौ माता को सडक़ों पर ही रहना क्यों पड़ रहा है गोधन की उपयोगिता निरंतर क्यों घटती जा रही है जा रही है। पहले ग्रामीण जनता का जीवन गोधन के बिना अधूरा था । आज यही गौ माता लोगों के लिए बोझ बन रही है । लोग गौ माता को मरने के लिए लावारिस छोड़ रहे हैं । आजकल हर गांव में लावारिस मवेशियों के बड़े बड़े झुंड नजर आते हैं । इन मवेशियों के कारण गांव की फसलें चौपट हो रही हैं । इन मवेशियों के मालिक भी इन्हें वापस नहीं ले जा रहे हैं । एक गांव से दूसरे गांव दूसरे गांव से तीसरे गांव इन मवेशियों को हकालने के लिए ग्राम वासी परेशान रहते हैं । लेकिन समस्या वही की वही बनी हुई है । आखिर इसका कारण क्या है दर असल यह समस्या अनियोजित विकास का साइड इफेक्ट है । मशीनी करण और ट्रेक्टर के कारण हमारे बैल अनुपयोगी हो गए हैं। रासायनिक खाद के कारण हमारा पवित्र और उपजाऊ गोबर अनुपयोगी हो गया है। गौचर भूमि की कमी के कारण गौमाता भूख से व्याकुल होकर कागज कचरा और प्लास्टिक खाने के लिए मजबूर हो गई हैं। खरीदा हुआ चारा खिलाकर दूध उत्पादन करना किसानों के लिए अत्यंत घाटे का सौदा हो गया है । गांवों में गाय चराने वाले चरवाहों को पर्याप्त पारिश्रमिक देना किसानों के लिए मंहगा साबित हो रहा है। इस समस्या से निजात के लिए अधिक संख्या में गौशाला खोलने की आवश्यकता महसूस हो रही है। लेकिन पुरानी गौशालाओं की अराजक स्थितियों को देखते हुए नहीं लगता कि नई गौशाला खोल कर गौ माता की रक्षा की जा सकती है । क्यों कि वर्तमान में जो गौ शालाएं हैं उनमें महामारी और भूख से बड़ी संख्या में गौ माता के मरने की खबरें आती रहती हैं । जितनी बड़ी संख्या में गौमाता असुरक्षित घूम रही है उतनी बड़ी संख्या में गौशालाएं खोलना भी कठिन है। इतने अधिक मवेशियों के लिए चारे और सुरक्षा की व्यवस्था कर पाना भी मुश्किल होगा । इस परिस्थिति में मेरा सुझाव है कि
1 जो भी गौचर भूमि गांवों में बची हुई है उसे सुरक्षित एवं संरक्षित किया जाए ।
2 गांव के नजदीक वन क्षेत्र का भी कुछ हिस्सा गौ माता के लिए सुरक्षित छोड़ा जाए ताकि गौ माता को पर्याप्त चारा मिल सके।
3 हम जितना ध्यान जंगली जानवरों की सुरक्षा के प्रति दे रहे हैं उससे ज्यादा ध्यान गौ माता के प्रति देने की आवश्यकता है।
4 और सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि गांव में चरवाहे की व्यवस्था शासन द्वारा की जाए क्योंकि गाय बैल चराना गांवों की बहुत ही प्रमुख आवश्यकता है ।
5 कम पारिश्रमिक के कारण चरवाहे आज कल गाय चराना बंद कर रहे हैं। गांव में चरवाहा नहीं मिलना किसानों द्वारा पशुपालन के प्रति उदासीनता का सबसे बड़ा कारण है । चरवाहों के लिए शासन की ओर से पारिश्रमिक की व्यवस्था होनी चाहिए ।
6 उचित पारिश्रमिक और सुरक्षित भविष्य मिलने से हमारे चरवाहे गोधन की सेवा और सुरक्षा के लिए प्रेरित होंगे तथा हमारी गौ माता सुरक्षित रह सकेगी ।
7 जो गौशालाएं वर्तमान में संचालित हैं शासन स्तर पर उनका नियमित निरीक्षण किया जाए एवं सुचारू संचालन की व्यवस्था की जावे ।
8 कुछ बड़े किसानों के पास अभी भी गौ पालन करने के लिए साधन सुविधा है । ऐसे किसानों को अनुदान देकर निजी गौशाला खोलने हेतु प्रोत्साहित किया जाए ।
9 गोबर और गौमूत्र के वैज्ञानिक महत्व की खबरें आती रहती हैं । इस दिशा में अधिक प्रयास किये जावें ताकि गोबर तथा गौमूत्र की उपयोगिता बढ़ाई जाए ।
10 हो सके तो सरकार गोबर और गोमूत्र की स्वयं खरीदी भी करे और जरूरत मंदों तक सप्लाई करे । इससे गोपालन करने वाले किसान उत्साह और रुचि के साथ गौ माता की सेवा और सुरक्षा के प्रति ध्यान देंगे ।
11 इसके अलावा भी यदि इस समस्या के निदान के लिए शासन के पास कोई योजना है तो उसे तुरंत लागू करे ।
अन्यथा यह समस्या और भी विकराल रूप धारण कर लेगी ।

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  • Published: 3 months ago on September 20, 2018
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  • Last Modified: September 20, 2018 @ 4:28 pm
  • Filed Under: Editorial

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