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संपादकीय

By   /   June 27, 2018  /   No Comments

2019 का आम चुनाव अभी दूर है उससे पहले छत्तीसगढ़ का चुनाव होना है। राष्ट्रीय परिदृष्य में हर घटना क्रम को 2019 के चुनाव के परिपेक्ष्य में देखा जा रहा है। जम्मू काश्मीर में पीडीपी के साथ भाजपा का बेमेल गठबंधन अंतत: टूट गया और मुख्यमंत्री महबुबा का त्याग पत्र हो जाने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने के मार्ग प्रशस्त्र हो गए हैं। भाजपा की सोच और रीत के हिसाब से पीडीपी के उसका गठबंधन ही सत्ता के लिए समझौता था, चार साल बाद समझौता का टूटना उनके धैर्य की ही परिणाम कहा जाएगा। जम्मू में कठवा कांड के बाद भाजपा बेकफूट पर थी कहीं न कहीं उसकी छवि पर भी छिंटे लगे हैं।
एक तरफ भाजपा ने जम्मू काश्मीर में समर्थन वापस लेकर स्वयं सरकार छोड़ी, दूसरी तरफ भाजपा के एलायंस धीरे-धीरे बिखरते जा रहे हैं। चन्द्राबाबू नायडू, शिवसेना तो पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं, वैसे कहें तो अकाली दल को छोड़ सभी घटक दल कहीं न कहीं कुछ न कुछ अपनी राग अलाप रहे हैं। भाजपा के लिए 19 राज्यों का सुनहरा सफर पहले कर्नाटक में अब जम्मू में धराशाही हो गया है। क्या ऐसे भाजपा की उल्टी गिनती मान लें। कुछ मोर्चे पर भाजपा की नीति को लेकर तीखे सवाल उठते रहे हैं, विकास के कथित गुजरात माडल को ही खोखला बताया जा रहा है। चार साल में अब लोगों को भी लगने लगा की सरकार जुमले बाजी ज्यादा काम कर रही है। अंतराष्ट्रीय नीतियों पर भी पहले जो दृढ़ता नजर आती थी वह अब बिखर रही है। अमेरिका सहित कई देशों से संबंध को लेकर सवाल उठने लगे हैं, तो हम किस मोर्चे पर सफल रहे। बेरोजगारों में जो आक्रोश है वह कितना जोशिला यह तो 2019 बतायेगा। वैसे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का अपने बयानों में यह कहना भाजपा को हराने के लिए किसी विरोधी दल की जरूरत नहीं आम आदमी ही उसके खिलाफ धीरे-धीरे खड़ा हो जाएगा। भाजपा के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना कितनी सहारा बनेगी क्योंकि उसमें जिनको आवास मिला वे जरूर खुश हैं जिन्हे नही मिला उनकी नाराजगी किस हद तक रहेगी यह बड़ा सवाल रहेगा। किसान नेता योगेन्द्र यादव तो स्पष्ट कहते हंै यह सरकार जो भी योजना बताती है या बनाती है उसे 2022 तक लागू करने की बात कहती है तो उनका सवाल रहता है कि आपने 4 साल तक क्या किया।
जीएसटी को लेकर जिस ढंग से अभी तक छोटे व्यापारी परेशान हैं, वे परंपरागत भाजपा के होते हुए भी क्या भाजपा के साथ जाऐंगे, यह एक बड़ा सवाल 2019 के लिए रहेगा। व्यापारी आम तौर पर कहता है हम टैक्स देने के लिए तैयार हैं हमें जबरन उलझाया न जाए, क्योंकि व्यापारी एक ऐसी कौम है जो 12 घण्टा से ज्यादा प्रतिदिन व 365 दिन काम करती है। ऐसा कुछ प्रायवेट सेक्टर से कर्मचारियों करते हैं बताया जाता है। भाजपा अपने एलायंस को बचाने मे जितनी कामयाब रहेगी उतने ही नुकसान से बचेगी।

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  • Published: 5 months ago on June 27, 2018
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  • Last Modified: June 27, 2018 @ 10:46 am
  • Filed Under: Editorial

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