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शराब आतंक का पर्याय बन चूका है अब तो इसे रोकें

By   /   May 30, 2018  /   No Comments

गजानंद राय (सरस्वती पुत्र) सराईपाली
शराब राष्ट्र व समाज के लिए हानिकारण है। राष्ट्र व समाज की सुरक्षा को देखते हुए इसे बंद कर देना उचित होगा। शराब व्यक्ति, राष्ट्र व समाज का नैतिक व आर्थिक पतन करने जा रहा है। यह मनुष्य को चेतना शून्य बनाने जा रहा है। शारीरिक दृष्टि से भी यह घातक है। राष्ट्र व समाज में अनेक प्रकार की अपराधिक घटनाओं का कारण भी शराब ही है। आज की पीढ़ी इसकी आदि हो चूकी हैं, जिससे घर-परिवार का माहौल इतना बिगड़ चुका है कि वह घर-परिवार इससे पूर्ण रूप से असुरक्षित है। शराब सेवन के कारण घर-परिवारों में यहाँ तक कि पढऩे वाले बच्चों का वर्तमान व व्यक्तित्व अंधकारमय होते जा रहा है, क्योंकि शराब की नशा मूर्त मनुष्य के समान ही होता है। शराबी लोग कहीं भी कुछ भी कर सकते हैं, क्योंकि कुछ समय उनमें चेतना ही नहीं होती है। यह मानव जाति के विनाश का सबसे बड़ा कारण बनते जा रहा है। लोग जितना आतंकवादियों से परेशान हैं उससे कहीं ज्यादा शराबियों से। शराब आतंक का पर्याय बन चुका है। हमेें अपने घर-परिवार, राष्ट्र व समाज को यदि बचाना है तो इसे बंद करना अति आवश्यक है। आओ हम चेतना में रहने चेतना की ओर आगे बढ़ें, शराब पीना छोड़ दें। केन्द्र व राज्य सरकार से भी अपील है कि राष्ट्र व समाज के हित एवं सुरक्षा के लिए इसे बंद करने हेतु निर्णय लेने का कष्ट करेंगे।

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  • Published: 3 weeks ago on May 30, 2018
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  • Last Modified: May 30, 2018 @ 9:55 am
  • Filed Under: Editorial

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