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राजनीति

By   /   May 30, 2018  /   No Comments

राजनीति और पद लोलुपता,
फैला रही अनैतिकता,
जहाँ नहीं कोई नैतिकता,
जाति-धर्म के नाम पर,
सिर्फ साम्प्रदायिकता।
कहाँ गयी भारत की,
वो एकता व अखण्डता,
यहाँ तो सिर्फ दिखती
पाखण्डता।
जागो अब जनता,
कौन भला, कौन बुरा,
जरा पहचानों उन्हें,
जो तुम्हें कुछ है माँगता।
अराजकता, अन्याय-अत्याचार,
तुम्हें कौन दे रहा,
खटमल-सा खून कौन पी रहा,
शायद! इस देश में ऐसा ही कुछ हो रहा है।
विधान से संसद तक,
क्या विधान है,
मेरे देश में भी,
एक संविधान है।।
गजानंद राय
(सरस्वती पुत्र) सराईपाली

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  • Published: 5 months ago on May 30, 2018
  • By:
  • Last Modified: May 30, 2018 @ 7:21 pm
  • Filed Under: Poetry

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