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योग करो

By   /   July 3, 2018  /   No Comments

योग करो भई योग करो,
सुबे शाम सब योग करो ।
मिल जुल के सब लोग करो,
ताजा हवा के भोग करो ।
योग करो भई योग करो ।।
जल्दी उठ के दंउड लगाओ,
आगे पीछे हाथ घुमाओ ।
कसरत अऊ दंड बैठक लगाओ,
शरीर ल निरोग बनाओ ।
प्राणायाम अऊ ध्यान करो ।
योग करो भई योग करो ।।
सुबे शाम सब घुमे ल जाओ,
शुद्ध हवा ल रोज के पाओ ।
ताजा ताजा फल ल खाओ,
शरीर ल मजबूत बनाओ ।
नियम संयम के पालन करो,
योग करो भई योग करो ।।
जेहा करथे रोज के योग,
वोला नइ होवय कुछु रोग ,
उमर ओकर बढ़ जाथे,
हंसी खुशी से दिन बिताथे ।
रोज हांस के जीये करो ।
योग करो भई योग करो ।।
रात दिन के चिंता छोड़,
योग से अपन नाता जोड़ ।
नशा पानी ल तैंहा छोड़
बात मान ले तैंहा मोर ।
लइका सियान सब लोग करो,
योग करो भई योग करो ।।
योग करो भई योग करो
सुबे शाम सब योग करो
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया, कबीरधाम (छ.ग.)

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  • Published: 3 months ago on July 3, 2018
  • By:
  • Last Modified: July 3, 2018 @ 10:38 am
  • Filed Under: Poetry

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