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यदि जीवन सार्थक करना है

By   /   May 19, 2018  /   No Comments

विचारों पर सार्थक प्रयास हमें कहां से कहां तक ले चलता है। यदि हमारे विचार समाज एवं राष्ट्र को नई दिशा देने मे सफल होते है तो निश्चित ही हम उस लक्ष्य को प्राप्त करते जाते है। जिसे मानव का मानव समाज पर एक ऐसा देन जिसे सब कोई सहज स्वीकार करते जाते है। हमारे विचार ही हमें उस तथ्य की ओर आगे बढ़ते जाते है। जिसमें नि:स्वार्थ की भावना से राष्ट्र एवं समाज को एक ऐसा गति एवं स्थिरता प्राप्त होते जाता है। जिससे वह अपना जीवन मूल्य को आंकने मे सहायक सिद्ध होता है। हमें उन सभी बुराइयों को जड़ से समाप्त करते जाना है जो हमारे राष्ट्र और समाज के विकास मे बाधा पहुंचा रहे है। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने विचारों को उस दिखावा की ओर ले चलते है जिससे और जिसमें समाज कल्याण एवं राष्ट्र और विश्व कल्याण निहित है। श्रेष्ठ विचारों की आवश्यकता ही हमे श्रेष्ठ बना सकते है। सार्थकता जीवन की विचारों पर विजय पाना होता है। राष्ट्र और समाज के कल्याण मे स्वयं का कल्याण निहित होता है स्वयं के कल्याण मे राष्ट्र व समाज। यदि जीवन सार्थक करना है तो अपने विचारों को श्रेष्ठ बनाइए।
गजानंद राय (सरस्वती पुत्र) सराईपाली

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  • Published: 1 month ago on May 19, 2018
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  • Last Modified: May 19, 2018 @ 9:13 am
  • Filed Under: Editorial

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