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मयारु तोर मया

By   /   January 12, 2018  /   No Comments

 

महेतरु मधुकर
पचपेड़ी, मस्तूरी, बिलासपुर
मयारु तोर मया जीये के आस
तयं हस त जम्मो सुख पास हे
तोर ले सजे हे सब सपना मोर
बिन तोर जिनगी ह बढ़ उदास हे
नीत दिन तोर सपना तोरेच सुरता
नई सुहावय तोर बिन काम बुता
मया के सफर म झन छोड़बे संगी
नई तो हो जाही दिल के कुटा कुटा
तोर मया म अपनापन अहसास हे
मन म मोर तोर मया के पियास हे
बिछड़े म लागे अब कहाँ संसार हे
संग बिन सच म घरघुंदिया के उजार हे
कभू शंका झन करबे मया म संगवारी
मोला तो बस तोर से ही पियार हे
तोर सिवा कोन हे जऊन खास हे
तनहा रहिके बता कहाँ गुंजास हे
झन छोड़बे नई तो हदर के मर जाहू
तोर जुदाई म कुछ आन तान कर जाहूं
अऊ नई हे सहारा जग म कोनो मोर
दगा देबे त जलन म भंगभंग ले बर जाहूं
आंसूआये न तोर नैना मोर परयास हे
अंतस म सिरतोन तोर मया के निवास हे

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  • Published: 4 days ago on January 12, 2018
  • By:
  • Last Modified: January 12, 2018 @ 4:10 pm
  • Filed Under: Poetry

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