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दुनिया बदलना है तो साहित्य मे समा जाओ

By   /   December 28, 2017  /   No Comments

गजानंद राय सरस्वती पुत्र
सराईपाली।
मो. 9753806835
यदि आप दुनियां बदलना चाहते है तो साहित्य मे रूचि लेना पड़ेगी तभी आप साहित्य की परिभाषा से परिचित हो सकेगें और उसके परिवेश मे आकर आप स्वयं और दुनियां को भी बदलते हुए देख पाएगें अन्यथा आप साहित्य के मधुर आनंदमय वातावरण से दूर हो जाएगें। अतएव साहित्य आपकी राह देख रहा है। तभी उसे देश समाज का दर्पण कहा गया है। आप अपना चेहरा साहित्य से देखिए। साहित्य मानव विकास का एक ऐसा माध्यम है जिससे मनुष्य अधिक विकास के साथ देश समाज को सही दिशा की ओर ले चलता है। यदि सामाजिक परिवेश मे सुधार लाना है या फिर मनुष्य जाति को उनके मूल्यों से परिचित करवाना है तो इसके लिए साहित्य की ओर चलना होगा। साहित्य एक ऐसा दर्पण है जिससे सब कोई अपना सुंदर चेहरा देख सकते है। सहित्य मे वह सब कुछ निहित है जो एक विकसित राष्ट्र का स्वप्न होता है। आओ अपने राष्ट्र के विकास के लिए साहित्य मे समा जाएं। साहित्य मे जिज्ञासा मनुष्य के अधूरेपन को पूरा करते जाना है। अच्छा साहित्य मनुष्य को मनुष्य से परे भी बना देता है। तब वह संसार को स्वंय उपदेश देने लगता है। जीवन की चेतना आप साहित्य से ही प्राप्त कर सकते है।

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  • Published: 12 months ago on December 28, 2017
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  • Last Modified: December 28, 2017 @ 5:13 pm
  • Filed Under: Editorial

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