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छत्तीसगढ़ के बेटा आंव

By   /   January 5, 2018  /   No Comments

 

महेन्द्र देवांगन माटी, गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला कबीरधाम
मय छत्तीसगढ़ के बेटा आंव धरती के सेवा करथंव
भूंइया के खातिर जीथंव अऊ भूइंया के खातिर मरथंव
सूत उठ के बड़े बिहनिया ए धरती दाई के पांव परथंव
कोनो परानी भूख मत मरें ए मैं पहिली सुमरनी करथंव
नांगर बइला मोर मितान ए ए एकरे साथ मैं खेलथंव
रापा कुदारी गैती बसुला ए एकर संग मैं झुलथंव
करथों मेहनत अपन दम में ए खेत में सोना उगाथंव
कतको बंजर भुंइया राहे ए ओला मैं हरियाथंव।
मय किसान के बेटा हरों ए जांगर टोर कमाथंव।
धरती दाई खुश हो जाथे ए अन्न जब मैं उपजाथंव।

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  • Published: 2 weeks ago on January 5, 2018
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  • Last Modified: January 5, 2018 @ 11:08 am
  • Filed Under: Poetry

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