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छत्तीसगढ़ के पहले हाइकुकार रमेश कुमार सोनी- गिरीश पंकज पेड़ बुलाते मेघ हाइकु संग्रह का विमोचन

By   /   June 27, 2018  /   No Comments

छत्तीसगढ़ में हिंदी के पहले हाइकुकार रमेश कुमार सोनी बसना की दूसरी हाइकु कृति पेड़ बुलाते मेघ का विमोचन कर अभिभूत हूँ कि आपने हिंदी हाइकु में आज फिर से एक नया मानक स्थापित किया है । आपके इस हाइकु संग्रह में विविध उपखंडों के साथ लगभग 700 हाइकु शामिल हैं जिनमें बिल्कुल ही नयापन है। अद्भुत संवेदनाओं के साथ इसमें छत्तीसगढ़ के मिट्टी की खुशबू भी रची बसी है । हाइकु एक जापानी विधा है जिसे हिंदी ने अपनाकर अपने रंग रूप में ढाल लिया है यही हमारी हिंदी और राष्ट्रीयता की विशेषता है जिस पर हमें गर्व है। आपके हाइकु में प्रकृति , आध्यात्म , वर्तमान मानवीय मूल्यों एवं कलात्मकता का एक विहंगम सौंदर्य है। आपके कई हाइकु का उल्लेख करते हुए उपरोक्त उद्बोधन गिरीश पंकज प्रख्यात साहित्यकार ने पंडित माधव राव सप्रे जी की जयंती के अवसर पर आपकी कृति की समीक्षा करते हुए व्यक्त की ।
इस अवसर पर मंच में मुख्य अतिथि प्रो सूरज बहादूर थापा, लखनऊ वि वि , अध्यक्षता डॉ केएल वर्मा कुलपति पं रविशंकर विवि रायपुर, विशिष्ट अतिथि जगदीश उपासने कुलपति पं माखन लाल चतुर्वेदी विवि भोपाल थे । आप सभी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे ।
सप्रे जयंति के अवसर पर विमोचन, सम्मान एवं परिचर्चा का वृहत आयोजन संस्कृति भवन रायपुर में किया गया । इस आयोजन में उपस्थित सभी अतिथियों ने समवेत रूप से पेड़ बुलाते मेघ का विमोचन किया तथा अपनी बधाईयाँ दी । ज्ञात हो कि सोनी की पहली हिंदी हाइकु संग्रह रोली अक्षत, छत्तीसगढ़ की पहली हाइकु संग्रह है ।
पेड़ बुलाते मेघ की भूमिका प्रख्यात हाइकुकार डॉ सुधा गुप्ता मेरठ ने लिखी है वहीं आवरण पृष्ठ का आकर्षण के रविन्द्र प्रसिद्ध चित्रकार ने उकेरा है । इसके फ्लैप पर पारितोष चक्रवर्ती एवं डॉ सुधीर शर्मा ने अपने अभिमत लिखे हैं । इसके प्रकाशक सर्वप्रिय प्रकाशन नई दिल्ली हैं ।
इस अवसर पर तेजिंदर गगन, डॉ जे आर सोनी, बद्री प्रसाद पुरोहित, लोरिश कुमार, मनहर चौहान, डॉ उर्मिला शुक्ला, डॉ रामकुमार बेहार, रामकुमार तिवारी, पद्मश्री अरुण शर्मा, प्रकाश मंगलेश सोहनी, उत्तर बारीक , सच्चिदानंद उपासने, डॉ सुशील त्रिवेदी, पारितोष चक्रवर्ती सहित कई साहित्यकारगण एवं हिंदी के शोध छात्र छात्राऐं उपस्थित थे ।

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  • Published: 4 weeks ago on June 27, 2018
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  • Last Modified: June 27, 2018 @ 10:48 am
  • Filed Under: Editorial

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