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क्या ऐसे ही चलेगा सिस्टम, क्योंं दिया सूचना का अधिकार आदेश के बाद भी नही मानते अधिकारी कौन करेगा कार्यवाही

By   /   July 11, 2018  /   No Comments

सराईपाली। सूचना के अधिकार कानून का गला दबाने का सिलसिला क्षेत्र में बदस्तूर जारी है। कानून के खुलेआम उल्लंघन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित शासन-प्रशासन की चुप्पी भी संदेहास्पद है। कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की पदोन्नति रोककर उन्हें पद से बर्खास्त करने की मांग आरटीआई कार्यकर्ताओं ने केन्द्रीय सूचना आयोग से की है। निर्धारित प्रपत्र में जानकारी मांगने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं को जानकारी नही मिलने या भ्रामक जानकारी प्रदाय करने के मामले आए दिन सुनने को मिल रहे है। ताजा मामले में आरटीआई के द्वितीय अपील के तहत राज्य सूचना आयुक्त के आदेश का एक साल बाद भी परिपालन न करने की बात सामने आई है। वहीं कानून का उल्लंघन करने वाले जनसूचना अधिकारी पदोन्नत होकर सराईपाली से जा भी चुके है। ऐसे में उनके स्थान पर पदस्थ जनसूचना अधिकारी में अपनी ढपली अपनी राग पीट रहे है। दरअसल राज्य सूचना आयुक्त द्वारा एक वर्ष पूर्व द्वितीय अपील प्रकरण में अपील स्वीकार करते हुए जनसूचना अधिकारी को अपीलार्थी द्वारा मांगी गई जानकारी नि:शुल्क प्रदान करते हुए आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदाय करने का निर्देश दिया गया था। राज्य सूचना आयुक्त द्वारा जारी आदेश का पालन कौन करवायेगा और न करवाने पर दोषी कौन होगा इस पर अब सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि आदेश तो दिया गया पालन कोई नही करा रहा है।
केस 1
सराईपाली जनपद पंचायत में आरटीआई कार्यकर्ता सौरभ गोयल को गुमराह करते हुए अवलोकन के लिए सूचना आवेदन पत्र पर भी गैरवाजिब ढंग से भारीभरकम राशि की मांग करते हुए तात्कालीन जनसूचना अधिकारी प्रेमलता मण्डावी ने प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम, पता भी देने में कोताही बरती थी। जिसके बाद राज्य सूचना आयोग में आवेदक द्वारा प्रस्तुत द्वितीय अपील को स्वीकार करते हुए जनसूचना अधिकारी के इस कृत्य पर टिप्पणी भी गई। साथ ही अपीलार्थी को अवलोकन करा जानकारी नि:शुल्क प्रदाय करने सहित 3 अपील प्रकरणों में 500 रू क्षतिपूर्ति प्रदाय किए जाने का आदेश 13 अप्रेल 2017 को जारी किया था। 14 माह बाद भी राज्य सूचना आयुक्त के फैसले को स्थानीय जनपद के अधिकारियों ने ध्यान नही दिया जिसकी शिकायत पुन: राज्य सूचना आयुक्त के पास की जाएगी।
केस 2
स्थानीय निवासी दिलीप गुप्ता ने बताया कि तहसीलदार कार्यालय में सूचना के अधिकार कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। उन्होनें सूचना के अधिकार के तहत आवेदन पर जानकारी न मिलने के फलस्वरूप प्रथम अपील से होते हुए द्वितीय अपील पर राज्य सूचना आयोग के समक्ष जानकारी नही दिए जाने आवेदन प्रस्तुत किया था। गत वर्ष अपील पर सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयुक्त द्वारा आवेदक को नि:शुल्क जानकारी के अलावा क्षतिपूर्ति के रूप में 500 रू दिए जाने का आदेश भी जनसूचना अधिकारी कार्यालय तहसीलदार सराईपाली को दिया गया था। एक साल बीतने के बावजूद राज्य सूचना आयोग के फैसले पर अधिकारियों अमल मे नही ला रहे हैं। दिलीप गुप्ता ने केन्द्रीय सूचना आयोग को पत्र लिखकर जनसूचना अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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  • Published: 2 weeks ago on July 11, 2018
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  • Last Modified: July 11, 2018 @ 10:06 am
  • Filed Under: News

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