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कल के लिए जल कहां से आएगा अपना बारिश का जल बचायें यही कल के लिए जल होगा 

By   /   May 30, 2018  /   No Comments

अवधेश अग्रवाल, सराईपाली
कल के लिए जल कहां से आएगा इस पर अब गहराई से चिंतन करने जरूरत है। क्योंकि जिस ढंग से भूजल स्तर इस क्षेत्र मे निचे जा रहा है तथा उसको रिचार्ज करने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है। सराईपाली अंचल मे लगभग 850 तालाब है तथा मध्यम और छोटे श्रेणी के 12 बांध है जिनकी सिंचाई क्षमता भी 115 करोड़ क्यूबिक फीट है। पानी की क्षमता को थेाड़ा बेहतर प्रबंधन कर बढ़ाया जा सकता है तथा कुछ बांध जो अपने बनने के समय से ही सवाल बनकर खड़े है उन्हें भी बेहतर करने के लिए एक सकारात्मक राजनीतिक सोच की जरूरत है। सबसे बढ़ा सवाल अब यह आने लगा है कि सराईपाली नगर के लिए जल कहां से आएगा? इस दिशा मे अभी तक किसी ने भी ठोस पहल नहंी किया है। कहने के लिए तो नगर मे 5 बड़े तालाब और अनेक डबरियां है। जहां इन दिनों लगभग सभी तालाबों और डबरियों मे पानी नहीं के बराबर है। भूजल स्तर तेजी से निचे जा रहा है, ऐसे मे बारिश के पानी का संरक्षण बढ़ाने के साथ भू जल को रिचार्ज करने की भी जरूरत है। साथ ही जरूरत है एक ऐसी योजना की जिससे आज से 20 साल बाद जब आबादी डबल हो जाए तब ,कल के लिए जल के लिए सोचना ही होगा।
इस बार काली दरहा बांध से भी पानी लाने का सोचा जा रहा है, हम यह क्यों नही समझ पाते की पानी का पानी हमारे तालाब को बेहतर प्रबंधन कर हम अपना ही पानी बचा सकते हैं और विशेषज्ञों की माने तो वाटर रिचार्ज और तालाबों को गहरीकरण कर पानी संग्रहण पर अगर ध्यान दिया जाए तो हम कभी भी पानी से रीते नहीं होगे, चाहे आबादी कितनी भी बढ़ जाऐ, क्योंकि आबादी बढ़ेगी तो रिचार्ज भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। पता नहंी प्रशासन का ध्यान इस दिशा मे क्यों नहीं जाता। वे बाहर से पानी लाने की सोचते हैं अपना पानी बचाने की सोचते नहीं।
जहां तक अंचल ने पानी की समस्या का सवाल है दो ही ऐसे साधन है, लात नाला और सुरंगी नदी। दोनो ही नदियां क्षेत्र के दो दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती है तथा दोनों मे ही पानी पूरी तरह गर्मी मे भी नहीं सूख पाता है। लात नाला मे पीएचई द्वारा उस अंचल के लगभग 50 ग्राम मे पेयजल प्रबंधन के लिए एक वृहद योजना बनाई गई थी। बोईरमाल के पास डाइवर्सन भी बनाया जाना था, उसमे संभावना है 75 लाख क्यूबिक फीट पानी रहेगा। सराईपाली का अगर चार भागों मे बांटा जाए तो उतर पूर्व की दिशा मे सिंगबहाल, सूखापाली, सिंघोड़ा और घुरऊ बांध का समवेद पानी आगे चलकर लात नाला मे आता है जो कि बारडोली से आगे बढक़र वह महानदी मे जाकर मिल जाता है। इसमे गर्मी के दिनों मे भी पानी का बहाव बना रहता है। बोईरमाल और लात नाला मे अगर प्रबंधन किया जाए तो यह पानी सराईपाली क्षेत्र के लिए कल का जल हो सकता है। इसकी संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए।
दूसरा है दक्षिण सराईपाली की ओर सुरंगी नदी भी इस अंचल के लिए वरदान हो सकती है। यह नदी उडि़सा के ओंग नदी मे जाकर मिल जाती है, कहने के लिए तो इस अंचल की एक मात्र नदी है, ओंग नदी मे जाने से पहले विभिन्न स्तरों पर इसमे एनीकेट या जो तकनिकी रूप से संभव हो वैसा पानी को रोक कर अंचल के लिए वरदान बनाया जा सकता हैै। जिसके लिए एक दूर दृष्टिपूर्ण अवलोकन और अध्ययन की जरूरत है।
किन बांधो मे क्या है क्षमता- सिंगबहाल बांध मे सबसे ज्यादा 30 करोड़ क्यूबिक फीट पानी की संग्रहण क्षमता है। उसके बाद घोरघाट की भी लगभग यही क्षमता है। कालीदरहा और सिंघोड़ा मे 15 करेाड़ क्यूबिक फीट पानी संग्रहण की क्षमता है। लमकेनी जलाशय मे 10 करेाड़, थीपापानी मे 4 करेाड़, छीर्रापाली मे 5.50 करेाड़, पैकिन मे 3 करेाड़, महल पारा सराईपाली मे 2 करेाड़ तथा मोखापुटका मे 1 करोड़ और पुटका मे 2.50 करोड़ क्यूबिक फीट पानी संग्रहण की क्षमता है। इसमे से कुछ बांधों के औचित्य पर सवाल शुरू से बना हुआ है जिसमे पुटका और सिंघोड़ा के जलाशय आते है। इन दोनों को दुरूस्त किया जाए तो इन क्षेत्रों की समस्याएं हल हो सकती है।
कहने के लिए तो यह कहा जाता है पानी मे सबसे पहला हक पीने वालों का है, दूसरा हक निस्तार के लिए है, उसके बाद तीसरे मे सिंचाई का हक बनता है। सरकार को जल प्रबंधन मे इस बात का अब ध्यान रखना हेागा। पानी इन दिनो निस्तार और जलस्तर बढ़ाने की बजाय सिंचाई मे ज्यादा जा रहा है। पानी के विशेषज्ञ तेा पानी के उपयोग पर ही सवाल उठाते है, उनका कहना है किसान सिर्फ धान की खेती करते है जिससे पानी की खपत ज्यादा होती है। सीधे सिंचाई करने से जल का 35 प्रतिशत उपयोग होता है इसे अगर स्प्रींगलर के माध्यम से सिंचाई किया जाए तो 65 प्रतिशत जल का उपयोग हो पता है। उसे ही अगर ड्रीप के माध्यम से किया जाए 80 प्रतिशत जल का उपयोग हो सकता है। इसलिए किसानों को नई तकनिक का उपयोग करने के साथ ज्यादा पानी लगने वाली फसल लगाने से रवि फसल के समय बचना होगा।
क्षेत्र के एक दो जलाशयों को छोडक़र सभी जलाशयों का पानी सिंचाई के लिए उपयोग मे आ रहा है। जलाशय का लगभग 6 फुट पानी वाष्पीकरण हो जाता है तथा 20 प्रतिशत पानी डेड स्टोरेज के रूप मे बांधों मे होता है। क्या उस पानी को गर्मी के दिनों मे पेयजल के रूप उपयोग मे लाया जा सकता है। 10 प्रतिशत पानी का प्रबंधन किया जा सकता है।
नगर में 2 करोड़ की क्षमता का बांध तथा 3 बड़े-बड़े 18 से 20 एकड़ के तालाब हैं, इन्हे बारिश के पूर्व गहरीकरण कर पूर्णत: पानी बारिश के दिनों में भरा जाए साथ ही पालिका द्वारा वाटर रिचार्ज को गंभीरता से लिया जाए तो हमें बाहर से पानी लाने की जरूरत नही पड़ेगी हम अपने ही पानी से अपनों का प्यास बुझा सकेेंगे।

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  • Published: 3 weeks ago on May 30, 2018
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  • Last Modified: May 30, 2018 @ 7:23 pm
  • Filed Under: Editorial

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