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कर्मचारियों को शोषित करते शैक्षणिक संस्थान

By   /   July 11, 2018  /   No Comments

जिले के शैक्षणिक एवं व्यवसायिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के साथ कैसे-कैसे अन्याय कर रहे हैं इनका ज्वलंत उदाहरण अशासकीय स्कूल अंचल के गली कुचों में खुल गए जहां न तो श्रम विभाग के नियम लागु हो रहे हैं और न ही अधिकारी जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं। एक ओर जहां कुछ अशासकीय स्कूलों में शैक्षणिक स्टॉफ का वेतन दो तीन हजार रूपये है वही शासकीय स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का वेतन आसमान छू रहा है। अशासकीय शिक्षकों को श्रमविभाग श्रमिक एवं कर्मचारी नही मानता, शायद इसलिए इन्हे कलेक्टर दर पर वेतन नही दिया जा रहा है । स्कूल संचालक कभी भी इन्हे शिक्षकीय कार्य से हटा देते हैं ठीक इसी प्रकार व्यवसायिक संस्थानों में भी कर्मचारियों का शोषण हो रहा है।
नगर में गुमास्ता एक्ट लागू नही होने के कारण कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश नही मिलता है। निजी स्कूलोंं में पढ़ाने वाले शिक्षकोंं, फै क्ट्रियों में कार्यरत श्रमिकों तथा समस्त कुशल अकुशल अद्र्धकुशल उच्च कुशल श्रमिकों को दैनिक मजदूरी निर्धारित करते हुए संस्थानों को तथानुसार देने हेतु कहा जाए, इस आशय के पत्र शासन को लिखा गया है।
रणवीर मेश्राम महलपारा, सराईपाली

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  • Published: 4 months ago on July 11, 2018
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  • Last Modified: July 11, 2018 @ 10:02 am
  • Filed Under: Editorial

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