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आम आदमी और सरकारें

By   /   July 3, 2018  /   No Comments

दिल्ली में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है तब से एलजी से टकराव तथा अधिकारियों के हितों से टकराव की बात सामने आ रही है। अधिकारी कर्मचारी ईमानदार सरकार की कड़ाई से परेशान होंगे तो उनका विरोध समझ में आता है, मगर एलजी से टकराव कहीं न कहीं केन्द्र के इशारों के आरोप को सही बताता है। भाजपा के लोग ही आरोप लगाते हैं कि दिल्ली की आप सरकार जो वादा की थी वह पूर्ण नही कर रही है, दूसरी तरफ आप के नेता कहते हैं वे जो भी जनहित के प्रस्ताव भेजते हैं वे एलजी के ऑफिस में जाकर रोक दिया जाता है तो विकास कहीं न कहीं प्रभावित होता है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं एलजी से मिलने का समय मांगा न मिलने पर वहीं धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि अघोषित हड़ताल आएएस अधिकारियों की बंद करवाई जाए और दिल्ली के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।
दिल्ली में न्यूज चैनल के सर्वेक्षण के बाद यह तो साफ हो गया दिल्ली की आप सरकार बेहतर काम कर रही है, मगर उन्हे काम करने नही दिया जा रहा है, अगर काम करने दिया जाए तो कितना बेहतर रिजल्ट आएगा, यह भारतीय राजनीति में सोचना अटपटा लगता है। पहली बार लगता है कि सरकार जनता के लिए काम कर रही है। 40 सेवाओं की जो बात आम आदमी पार्टी कर रही है उससे सरकारी कर्मचारी तंत्र वास्तव में अभी जो नौकरशाह बने हुए हैं वे नौकर हो जाऐंगे। इसलिए कहीं न कहीं से अंदर से विरोध आ रहा है। बिजली को सस्ती और पानी को मुक्त कर दिया है। निजी स्कूलों के मुकाबले शासकीय स्कूलों की शान बढ़ा दी है और निजी स्कूलों पर नकेल भी कस दिये हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं पर जो काम दिल्ली सरकार ने किया है जिसकी तारीफ संयुक्त राष्ट्र संघ के सचिव रह चुके कोफि अन्नान ने भी की है, यह कोई सामान्य बात नही है। पिछले दिनों एक नया आदेश जिससे लगता है कि आम आदमी का कितना महत्व है, दिल्ली में विद्युत अगर एक घण्टा गुल रहेगी तो विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ता को 50 रू प्रति घण्टे हर्जाना देना होगा। छग में तो बिजली बिल की लूट सभी को मालूम है, जो बिल आ गया जिसमें विभाग की गलती रहती है फिर भी पटाओ तब होगी सुनवाई। महीनों रीडिंग नही होती घर बैठे बिल भेज दिया जाता है, जो कि हकीकत से दूर होता। एक साथ जब बिल दिया जाता है तो उसका स्लेब हजारों में पहुंच जाता है, इसके अलावा विद्युत कटौती का बुरा हाल है, जिसे कभी लोड सेडिंग तो कभी ट्रीपिंग तो कभी फाल्ट बताया जाता है। गांव में तो रात-रात भर, सप्ताह भर लाईट गुल रहती है सुनवाई वाले साहब तो बस साहब होते हैं। क्योंकि यहां आम आदमी की कदर नही है।
किसी भी सरकार को बिजली पानी सडक़ शिक्षा स्वास्थ्य और गरीबों को भूख से बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए, कागजों मे बताया भी जाता है मगर धरातल में तो पूरा तंत्र अपने हिसाब से चलता है उस पर नकेल कसने वाला कोई नहीं।
किसानों के लिए सुविधाऐं बढ़ी हंै मगर पर्याप्त नही हैं। पीने के साथ सिंचाई के पानी के लिए विजन मे प्रोविजन कम है, जो दिखता है। आज छत्तीसगढ़ बनने के 15 साल बाद सिंचाई पर काम कम हुआ है, स्टाप डेम पर फोकस रहा जिसमें पानी गर्मी तक कहीं-कहीं ही बच पाता है। भू-जल और भू-तल पर पानी बचाने के लिए आज अगर प्रयास नही हुए तो यह मानकर चलिए कि आने वाली पीढ़ी के लिए हम एक बड़ी समस्या छोडक़र जा रहे हैं। सडक़ और भवनों पर काम हो रहा है जिनकी क्वालिटी भ्रष्टाचार में दबी नजर आती है, पहले अस्पतालों मे डॉक्टर हुआ करते थे अब भवन है डॉक्टर गायब हैं। इसी तरह पहले स्कूलों में शिक्षकों का वजुद होता था अब न शिक्षक रहे न शिक्षा।
कहीं भी बुनियादी सोच आम आदमी के लिए नजर नही आती। आम आदमी पार्टी ने अपनी कार्यशैली और सोच से उम्मीद जगाई है लेकिन उसे कितना दूर तक ले जा पाते हैं यही हमारी राजनीति को परिवर्तन की राह दिखा सकती है। युवाओं को इसके लिए शर्त रखनी चाहिए कि जो सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के पानी की चिंता करेगी और नवजवानों को रोजगार स्वरोजगार के लिए काम करेगी हम उनके साथ खड़े होंगे।

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  • Published: 3 months ago on July 3, 2018
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  • Last Modified: July 3, 2018 @ 10:36 am
  • Filed Under: Editorial

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