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अशिष्ट पाक से कोई भी उम्मीद महज छलावा

By   /   January 5, 2018  /   No Comments

अनिल पुरोहित
वरिष्ठ पत्रकार
भारत को यह समझने में अब जरा भी विलंब नहीं करना चाहिए कि यह पड़ोसी देश अपने अशिष्ट आचरण से बाज आने वाला नहीं है। एक तो पाकिस्तान ने इस मुलाकात को एक तरह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बदल दिया और दूसरे, इस दौरान कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी से ऐसा व्यवहार किया जो किसी भी सभ्य देश को शोभा नहीं देता।
उम्मीद तो यही की जा रही थी कि तमाम अंतर्विरोधों से ग्रस्त पाकिस्तान जासूसी के आरोप में पकड़े गए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से उनकी माता और पत्नी की सहज, अंतरंग और नितांत पारिवारिक स्तर की भेंट करवाएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मटियामेट होती छवि से मुक्त होने की कोशिश करेगा। लेकिन अशिष्ट आचरण जिस देश की फितरत में घुला हो, उससे ऐसी उम्मीद नितांत बेमानी है। जिस तरह एक बेटे और एक पति के तौर पर कुलभूषण को उनकी मां व पत्नी से मिलाया गया। क्या वह मानवीय और शिष्ट आचरण की श्रेणी में माना जा सकता है। क्या यह परिजनों की मुलाकात कही जाएगी जिसमें पत्नी और मां किसी से मिलने जाएं और उनके बीच एक शीशे की दीवार हो। न स्पर्श न झप्पी बस एक दूसरे को देख पाना और स्पीकर के माध्यम से बात करना! बावजूद इसके पूरी दुनिया में अपनी न्याय व्यवस्था को मानवीय बताकर पाकिस्तान के सत्ताधीश और वहां के नौकरशाह इस मुलाकात को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने लिए एक अवसर के तौर पर भुनाने की शर्मनाक कोशिशों में भले जुट जाएं पर सच तो यही है कि मानवता और रिश्तों की संवेदना व मर्यादा की उसे जरा भी समझ नहीं है। इस मुलाकात से भारत को यह समझने में अब जरा भी विलंब नहीं करना चाहिए कि यह पड़ोसी देश अपने अशिष्ट आचरण से बाज आने वाला नहीं है। पाकिस्तान ने इस मुलाकात के दौरान कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी से ऐसा व्यवहार किया जो किसी भी सभ्य देश को शोभा नहीं देता। सुरक्षा के नाम पर जाधव की मां और पत्नी को न केवल अपने वस्त्र बदलने के लिए विवश किया गया। बल्कि उनके आभूषण और बिंदिया भी उतरवा ली गई। इस दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी धार्मिक भावनाओं की तो अनदेखी की ही, उन्हें कुलभूषण जाधव से मातृभाषा में बातचीत करने की अनुमति भी नहीं दी गई। समझना कठिन है कि इन दोनों भारतीय महिलाओं को तंग और अपमानित करने के सिवाय पाकिस्तान का और क्या मकसद रहा होगा। जाहिर है कि और जैसा कि खुद पाकिस्तानी मीडिया कह रहा है। इस मुलाकात के सारे इंतजाम इसीलिए किए गए। क्योंकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय अदालत में चल रहे कुलभूषण जाधव के मामले में अपने पक्ष को कमजोर नहीं करना चाहता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को मानना पाकिस्तान के लिए कोई बाध्यता नहीं है। कई देश अतीत में उसके आदेशों की अवहेलना कर चुके हैं। लेकिन उम्मीद यही है कि अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए पाकिस्तान ऐसा नहीं करेगा।
यह पहला मौका नहीं था जब पाकिस्तान ने किसी भारतीय नागरिक को पकडक़र जासूस घोषित कर दिया और फिर फांसी की सजा सुना दी हो। सरबजीत का मामला तो भारतीयों को हमेशा याद रहेगा जो कई साल तक चर्चा का विषय बना रहा था। एक ही सरबजीत पर पाकिस्तान में कई नाम से मुकदमे चलाए गए थे। खुद पाकिस्तान के कई मानवाधिकार कार्यकर्ता उसके पक्ष में खड़े हो गए थे। लेकिन अंतत: रहस्यमय स्थितियों में उसकी जान ले ली गई। चमेल सिंह व किरणपाल सिंह नाम के दो भारतीयों को भी पाकिस्तान हाल में फांसी पर लटका चुका है। ऐसे भी कई लोग हैं, जो जासूसी के आरोप में पकड़े गए और फांसी से बच गए, पर न जाने कब से वहां की जेलों में कैद हैं। लेकिन ताजा मामला कुलभूषण जाधव और उनकी माता व पत्नी की मुलाकात का है जिसमें पाकिस्तान ने अपने आचरण की अशिष्टता की छाप छोड़ी है। जिस तरह का माहौल इस मुलाकात के दौरान बनाया गया, वह पाकिस्तान की धूर्तता को रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है। मुलाकात से पहले ही नहीं, अपितु मुलाकात के बाद भी अमर्यादित आचरण का सिलसिला जारी रहा। उस समय तो समस्त मर्यादाओं का उल्लंघन होता दिखा जब पाकिस्तानी पत्रकारों को कुलभूषण जाधव की पत्नी और मां से अशिष्ट सवाल करने की सुविधा प्रदान कर दी गई। दुर्भाग्य से पाकिस्तानी पत्रकारों ने भी अमर्यादित आचरण करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कुलभूषण जाधव की मां से ऐसे सवाल तक किए कि उन्हें एक दहशतगर्द की मां होने के नाते कैसा लग रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार तो इस बात पर भी हैरत में हैं कि पाकिस्तान इस मुलाकात के बहाने दुनिया को कुछ संदेश देने की कोशिश कर रहा था और इसी कारण उसने सारे शिष्टाचार ताक पर रखकर कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी से मुलाकात के फोटो सार्वजनिक करने में जरूरत से ज्यादा तत्परता दिखाई। निश्चित रूप से यह घटना भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अब भारत को इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए क्योंकि शठं शाठ्ये समाचरेत््य की सीख भी हमने ही दुनिया को दी है। यकीनन विदेश मंत्रालय ने इस मामले में जो रवैया अख्तियार किया और जिस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की, वह संतोषजनक प्रतीत नहीं हो रही है। भारत को इस मामले के परिप्रेक्ष्य में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को अच्छी तरह घेरने की रणनीति पर काम करना चाहिए ताकि पाकिस्तान को शर्मिंदगी का अहसास हो अथवा उसे कोई सबक मिले।
यह भी एक स्थापित सत्य ही माना जा सकता है कि हमारा पाला एक ऐसे पड़ोसी देश से पड़ा है जो किसी भी हद तक गिरने के लिए तैयार है और उसे आसानी से सही रास्ते पर नहीं लाया जा सकता। इसके संकेत भी मिल रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को प्रभावित करने वाली दो घटनाएं पिछले दो दिनों में हुई हैं। पहली घटना तो कुलभूषण जाधव से उनकी मां व पत्नी की मुलाकात अपमानजनक ढंग से कराने की है दूसरी घटना है। भारतीय सैनिकों का सीमा पार करके हमला बोलना। पाकिस्तान की तरफ से बीते शनिवार को घात लगाकर किए गए हमले में मेजर सहित चार भारतीय जवान शहीद हुए थे। जवाबी कार्रवाई करते हुए हमारी सेना ने सीमा पार की और एक पाकिस्तानी चौकी को ध्वस्त कर दिया। खबर है कि इस कार्रवाई में तीन पाकिस्तानी सैनिक मार गिराए गए हैं। हालांकि आकलन इससे ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने व कई के घायल होने का है। ये दोनों घटनाक्रम 2017 के बारे में काफी कुछ बता रहे हैं और 2018 को लेकर कुछ अंदेशा भी दे रहे हैं।

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  • Published: 2 weeks ago on January 5, 2018
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  • Last Modified: January 5, 2018 @ 11:10 am
  • Filed Under: Editorial

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