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अब जिम्मेदारी तय करना होगा?

By   /   September 8, 2018  /   No Comments

विचार- अमृतलाल पटेल, जोगनीपाली

हमारे देश में एक कहावत तो आम है कि तील का ताड़ एवं राई का पहाड़ बनाना, आज यह कहावत यहां पूूरी तरह चरितार्थ हो रहा है। ज्यों-ज्यों चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा लोगों का उल जूलूल बकना शुरू हो गया है और इन बातों पर बहस आयोजित करना हमारी इलेक्ट्रानिक मीडिया अपना अधिकार मान रही है। जो बात जहां के तहां दफन हो जानी चाहिए उसे देश देशांतर तक पहूंचा कर बवाल खड़े कर रही है और तो और इनका एंकर सही या गलत का फैसला करने लगे है। प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रानिक मीडिया इनका काम केवल लोगों तक समाचार पहूंचाना होना चाहिए पर ये अब न्यायालय की भूमिका में है। किस नेता को सर्दी है किस अभिनेता की किससे लव अफेयर है या किसके दल में कौन है कौन नहीं ये भी बहस का विषय हो गया है। जिस किसी मुद्दे को लेकर बहस हो रही है उस पर दलगत प्रवक्ताओं के विचार जानने के बजाय आम जनता के विचार जाने तो बेहतर होता। दलीय आदमी अपने दल की बात व विचार को सही ठहराएगा ही, उनके बीच बहस की क्या आवश्यकता है। अभी एक ही विषय को इलेक्ट्रानिक मीडिया अपने कर्तव्य का बखुबी निर्वहन कर रही है वह है देश के अनेक प्रदेशों में जल प्रलय का इससे देश के अन्य क्षेत्रों में निवासरत लोग पीडि़तों की सहायता के लिए आगे आऐं एवं ऊपर वाले से उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। इन दिनों देश में प्राकृतिक विपदा आई है जिससे सम्पूर्ण देश में आपात स्थिति जैसे हालात हो गए हैं। अब ऐसे समय में राहुल ने क्या कहा प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री ने क्या कहा किस मुसलमान युवक की, हिन्दु युवक की हत्या हो गई जो एक उत्तेजनात्मक माहौल पैदाकर सकती है, उस पर संयम बरतना भी उनका कर्तव्य बनता है।
कहीं घर जल रहा है कोई किसी को पीट रहा है कोई डूब रहा है उनको बचाने के बजाय लोग उनका वीडियो बना रहे हैं उस बनते वीडियो में नही के बराबर लोग बचाव में दिखते हैं। आज कश्मीर एक विस्फोटक मुद्दा है जिसके बारे में देश के लोगोंं को जानना जरूरी है पर उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए कुछ बातें जो देश के अन्य हिस्सों में बवाल खड़े कर सकते हैं। ऐसी खबरों पर संयम बरतना भी आवश्यक है पर यहां तो टीआरपी बढ़ाने की होड़ मची है सबसे पहले खबर कौन पहुंचाऐ इस बात पर होड़ मची है इस चक्कर में बहुत सी अच्छी खबरें लोगों तक पहूंचने से बच जाती है क्योंकि ये उत्तेजना पैदा नहीं करती। खबरें पहुंचाना अच्छी बात है क्योंकि यह उनका काम है पर नमक मिर्च डालने से बचें। बहुत ही विषम परिस्थिति है आज देश में कहीं भी ईमानदारी दिखाई नहीं दे रही और दिखाई दे भी तो कैसे बेईमानी के हम ही हिमायती है क्योंकि ईमानदारी के तहफ से हमें कुछ नहीं मिलने वाला जबकि बेईमानी के तरफ से उम्मीद है।
राजनीतिक दल जनतंत्र के हिस्सा हैं पर दल की फायदा की जगह देश की फायदा पर चुनाव हो, आम जनता को रियायत के मुद्दों पर चर्चा हो तो बात समझ में आती है पर यहां तो अपने कर्म को सही ठहराने पर एवं दूसरों के काम को गलत ठहराने में ही सभी राजनीतिक दल लगे हैं और हम है कि उनका समर्थन कर रहे हैं, क्या वास्तव में भारत अभी तक जनतंत्र के लायक देश नहीं बन पाया है? नहीं ऐसा तो नहीं है क्योंकि शिक्षा की कमी तो है नहीं तो समझदारी की कमी है हां ये हो सकता है। हम नागरिक ही एक स्वस्थ जनतंत्र देश का निर्माण कर सकते हैं ये राजनीतिक दल नहीं क्योंकि सरकार बनाने की जिम्मेदारी हमारी होती है। किन लोगों को सत्ता सौपें ये हमें तय करना होता है। यहां पर हम कितने सफल है कितने असफल इसके मुल्यांकन का समय आ गया है वरना जग हंसाई तय है।

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  • Published: 3 months ago on September 8, 2018
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  • Last Modified: September 8, 2018 @ 3:02 pm
  • Filed Under: Editorial

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